रंगदूत

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Sunday, 18 March 2018

एक मुकम्मल प्रस्तुति: भँवरा बड़ा नादान

'भँवरा बड़ा नादान' नाटक का मंचन मैंने पहली बार उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर जनपद में देखा। नवोन्मेष नाट्य उत्सव 2017 हेतु सात विभिन्न प्रदेशों से चुने गए सात चुनिंदा नाटकों में से एक था 'भँवरा बड़ा नादान'। श्री प्रसन्न सोनी जी द्वारा लिखित एवं निर्देशित इस नाटक के हैंगओवर से अब तक नहीं निकल पाया हूँ। अति सीमित संसाधन एवं चुनिंदा रंगकर्मियों के अभिनय से रंगे इस नाटक का आकर्षण इतना करिश्माई था कि मंचन के उपरांत देर तक पूरा प्रेक्षागृह तालियों की ध्वनि से गूँजता रहा। लेखन, निर्देशन, अभिनय, संगीत, प्रकाश आदि सबकुछ इतना उम्दा था कि दर्शकों ने इस नाटक को नवोन्मेष नाट्य उत्सव में मंचित श्रेष्ठतम् नाटकों की सूची में रखा। ये नाटक इस मायने में भी सिद्धार्थनगर के लिए यादगार रहा कि देश के विभिन्न प्रदेशों के 70 आई.ए.एस, आई.पी.एस एवं आई.एफ.एस ऑफिसर्स इस नाटक के साक्षी बने और सभी ने इसके सशक्त प्रस्तुति की खुले कंठ से प्रशंसा की।
मुझे हार्दिक ख़ुशी है कि श्री प्रसन्न सोनी जी द्वारा लिखित ये नाटक अब मुकम्मल किताब की शक्ल ले चुका है। शिवना प्रकाशन द्वारा प्रकाशित इस नाटक का बाहरी आवरण देखा तो पुनः इस नाटक से जुड़ी अनेक स्मृतियाँ जीवंत हो उठी। प्रसन्न सोनी जी के साथ ही सुनील उपाध्याय जी, भारती सोनी जी, ख़ुशी राजपूत जी, कुंदन रॉय जी समेत रंगदूत समूह के उन सभी साथियों को बधाई जो इस नाटक का अंग हैं। मैं पूर्णतः आश्वस्त हूँ कि प्रतिभा, ऊर्जा एवं असीमित संभावनाओं से भरी ये टोली इस नाटक को भारत के समस्त प्रतिष्ठित मंच तक पहुँचाएगी।
मृदुभाषी एवं सरल व्यक्तित्व के धनी श्री प्रसन्न सोनी जी मध्य प्रदेश के सीधी जनपद में रंगमंच की जो अलख जगाये हुए हैं वो अनुकरणीय है। नाटक को पुस्तक का आकार मिलने पर आपको बधाई। ये यात्रा यूँ ही रोचक बानी रहे यही शुभेक्षा है।



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